पीरियड्स के दौरान पेट दर्द के बारे में तो सभी बात करते हैं, लेकिन बहुत सी महिलाओं को इस दौरान पीठ के निचले हिस्से में भी तेज दर्द महसूस होता है। यह दर्द कभी-कभी इतना बढ़ जाता है कि रोजमर्रा के काम करना भी मुश्किल हो जाता है। इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि पीरियड में कमर दर्द क्यों होता है और उपाय क्या-क्या अपनाए जा सकते हैं।

पीरियड के दौरान कमर दर्द होने के पीछे मुख्य रूप से शरीर में होने वाले हार्मोनल और शारीरिक बदलाव जिम्मेदार होते हैं। आइए इसके प्रमुख कारणों को विस्तार से समझते हैं:
पीरियड शुरू होने से ठीक पहले गर्भाशय की परत (endometrium) में प्रोस्टाग्लैंडिन नाम के केमिकल बनते हैं। ये केमिकल गर्भाशय की मांसपेशियों को सिकोड़ने (contract) में मदद करते हैं, ताकि गर्भाशय की अंदरूनी परत शरीर से बाहर निकल सके। जब प्रोस्टाग्लैंडिन का स्तर ज्यादा होता है, तो यह सिकुड़न ज्यादा तेज हो जाती है, जिससे दर्द सिर्फ पेट तक सीमित न रहकर पीठ के निचले हिस्से तक भी फैल जाता है।
गर्भाशय और रीढ़ की हड्डी का निचला हिस्सा (sacrum) दोनों एक ही नर्व नेटवर्क से जुड़े होते हैं। इसलिए जब गर्भाशय में ऐंठन होती है, तो दर्द के संकेत इसी नर्व नेटवर्क के जरिए पीठ तक भी पहुंच जाते हैं। इसे मेडिकल भाषा में "रेफर्ड पेन" कहा जाता है, यानी दर्द एक जगह से शुरू होकर दूसरी जगह महसूस होना।
पीरियड से पहले शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन इन हार्मोनों में बदलाव में उतार-चढ़ाव होता है। इन हार्मोन में बदलाव रीढ़ की हड्डी के आसपास के लिगामेंट्स (ligaments) को थोड़ा ढीला कर सकते हैं, जिससे पीठ के निचले हिस्से में अस्थिरता और दर्द महसूस हो सकता है।
हर महिला के गर्भाशय की स्थिति अलग होती है, कुछ महिलाओं में गर्भाशय आगे की ओर झुका होता है, तो कुछ में पीछे की ओर (retroflexed uterus)। जिन महिलाओं का गर्भाशय पीछे की तरफ झुका होता है, उनमें पीरियड के दौरान कमर दर्द ज्यादा तीव्र महसूस हो सकता है।
कुछ मामलों में गंभीर और बार-बार होने वाला कमर दर्द किसी अंतर्निहित समस्या का संकेत भी हो सकता है, जैसे:
अगर दर्द सामान्य से कहीं ज्यादा तेज हो, हर महीने बढ़ता जाए, या रोजमर्रा की गतिविधियों को प्रभावित करे, तो डॉक्टर से जांच जरूर करवानी चाहिए।
अच्छी बात यह है कि ज्यादातर मामलों में पीरियड के दौरान होने वाला कमर दर्द घरेलू उपायों और छोटे जीवनशैली बदलावों से काफी हद तक कम किया जा सकता है:
पीठ के निचले हिस्से पर हीटिंग पैड या गर्म पानी की बोतल रखने से मांसपेशियों को आराम मिलता है और दर्द में तुरंत राहत मिलती है।

हल्के योगासन, स्ट्रेचिंग या टहलना रक्त संचार बेहतर करता है और मांसपेशियों की ऐंठन कम करता है। बिल्ली-गाय पोज़ (cat-cow stretch) और चाइल्ड पोज़ जैसे आसान स्ट्रेच खास तौर पर फायदेमंद माने जाते हैं।
इबुप्रोफेन जैसी नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं (NSAIDs) प्रोस्टाग्लैंडिन के स्तर को कम करके दर्द में राहत देती हैं। इन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लें।
शरीर में पानी की कमी सूजन और ऐंठन को बढ़ा सकती है, इसलिए पीरियड के दौरान खूब पानी पीना जरूरी है।
मैग्नीशियम मांसपेशियों को आराम देने में मदद करता है। केला, नट्स, बीज और हरी पत्तेदार सब्जियाँ इसके अच्छे स्रोत हैं।
पीठ के बल सोते समय घुटनों के नीचे तकिया रखना, या करवट लेकर घुटनों के बीच तकिया रखना पीठ पर दबाव कम करता है।
गहरी सांस लेने की तकनीक, मेडिटेशन या हल्का संगीत सुनना दर्द के प्रति शरीर की संवेदनशीलता को कम कर सकता है।
ये दोनों चीजें सूजन और ऐंठन को बढ़ा सकती हैं, इसलिए पीरियड के दिनों में इनसे परहेज करना बेहतर है।
पीठ के निचले हिस्से की हल्के हाथों से मालिश करने से मांसपेशियों को आराम मिलता है और रक्त संचार बेहतर होता है।
अगर घरेलू उपायों के बावजूद दर्द कम नहीं होता, या नीचे दिए गए लक्षण दिखें, तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से जरूर मिलें:

अगर पीरियड के दौरान कमर दर्द बार-बार और तेज होता है, तो इसे नजरअंदाज करने की बजाय सही जांच करवाना जरूरी है। Cloudnine Care में अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञ (gynecologists) पीरियड दर्द के सही कारण की पहचान करके, चाहे वह सामान्य हार्मोनल बदलाव हो या एंडोमेट्रियोसिस, फाइब्रॉएड जैसी कोई अंतर्निहित समस्या, आपके लिए सबसे उपयुक्त और सुरक्षित इलाज सुझाते हैं।
अगर आप पीरियड के दौरान लगातार तेज कमर दर्द से परेशान हैं, तो Cloudnine Care के विशेषज्ञों से आज ही अपॉइंटमेंट बुक करें और सही सलाह पाएँ।
पीरियड के दौरान हल्का कमर दर्द होना एक सामान्य बात है, जो मुख्य रूप से प्रोस्टाग्लैंडिन और हार्मोनल बदलाव के कारण होता है। ज्यादातर मामलों में यह घरेलू उपायों से ठीक हो जाता है, लेकिन अगर दर्द असहनीय हो या बार-बार बढ़ता जाए, तो इसे नजरअंदाज न करें और समय पर डॉक्टर से सलाह लें।

Want to consult the Best Gynecologists in India? Please find the links below.
Want to consult the Best Maternity Packages in India? Please find the links below.
आमतौर पर यह दर्द पीरियड शुरू होने से 1-2 दिन पहले शुरू होकर पहले 2-3 दिनों तक तेज रहता है और उसके बाद धीरे-धीरे कम हो जाता है।
हाँ, इबुप्रोफेन जैसी सामान्य दर्द निवारक दवाएं डॉक्टर की सलाह के अनुसार ली जा सकती हैं, लेकिन इन्हें बार-बार बिना सलाह के लेना उचित नहीं है।
गर्म सिकाई, हल्की स्ट्रेचिंग, पर्याप्त पानी पीना और सही पोश्चर में सोना सबसे आसान और असरदार घरेलू उपाय माने जाते हैं।
अगर दर्द बहुत तेज हो, हर महीने बढ़ता जाए, या रोजमर्रा की गतिविधियों को प्रभावित करे, तो यह किसी अंतर्निहित समस्या का संकेत हो सकता है और डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए।