Book an Appointment Now!
Call: +91 99728 99728

जब कोई कपल नियमित रूप से बिना किसी गर्भनिरोधक (Contraception) के संबंध बनाने के बाद भी गर्भधारण नहीं कर पाता है, तो इसे इनफर्टिलिटी (बांझपन) कहा जाता है। आमतौर पर, अगर एक साल तक कोशिश करने के बाद भी गर्भधारण न हो, तो इसे इनफर्टिलिटी की स्थिति माना जा सकता है। हालांकि, 35 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में 6 महीने बाद ही डॉक्टर से सलाह लेने की सलाह दी जा सकती है। इनफर्टिलिटी महिला या पुरुष, दोनों में प्रजनन से जुड़ी किसी समस्या के कारण हो सकती है। महिलाओं में ओवरी (अंडाशय), गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब, हार्मोनल बदलाव और अन्य स्वास्थ्य स्थितियां गर्भधारण में परेशानी का कारण बन सकती हैं। इनफर्टिलिटी एक आम समस्या है, जिससे दुनिया भर में कई लोग प्रभावित होते हैं। हालांकि, सही समय पर जांच, इलाज और विशेषज्ञों की सलाह से गर्भधारण की संभावना बढ़ाने के कई सुरक्षित और प्रभावी तरीके उपलब्ध हैं। आइए इनफर्टिलिटी के कारणों, लक्षणों और उपचार के विकल्पों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

बांझपन (Infertility)

महिलाओं में बांझपन (इनफर्टिलिटी) क्या है?

बांझपन (Infertility) एक ऐसी स्थिति है जिसमें कपल को गर्भधारण करने में परेशानी होती है। आमतौर पर, बिना किसी गर्भनिरोधक के नियमित प्रयास करने के बाद भी 12 महीनों तक गर्भधारण न होने पर इनफर्टिलिटी की जांच की जाती है। हालांकि, अगर किसी महिला को गर्भाशय, ओवरी या अन्य प्रजनन संबंधी समस्या है, तो इसका पता इससे पहले भी लगाया जा सकता है। उम्र, हार्मोनल असंतुलन, कुछ स्वास्थ्य समस्याएं और पर्यावरण या जीवनशैली से जुड़े कारक महिलाओं में इनफर्टिलिटी का कारण बन सकते हैं।

महिलाओं में बांझपन के लक्षण

महिलाओं में इनफर्टिलिटी (बांझपन) के अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते, लेकिन कुछ संकेत ऐसे हो सकते हैं जो प्रजनन संबंधी समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं:

समस्या

विवरण

असामान्य पीरियड्स

पीरियड्स के दौरान ब्लीडिंग सामान्य से बहुत कम या बहुत ज्यादा हो सकती है। 

पीरियड्स न आना

पीरियड्स अचानक बंद हो सकते हैं या कुछ महिलाओं को शुरुआत से ही पीरियड्स नहीं आते। 

अनियमित पीरियड्स

हर महीने पीरियड्स के बीच का अंतर बदलता रहता है। 

दर्दनाक पीरियड्स

तेज ऐंठन, पेल्विक एरिया में दर्द या पीठ दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। 

महिलाओं में इनफर्टिलिटी (बांझपन) कभी-कभी हार्मोनल असंतुलन या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी हो सकती है। ऐसी स्थिति में कुछ लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जैसे त्वचा में बदलाव, मुंहासे बढ़ना, कामेच्छा में बदलाव, ठुड्डी और छाती पर अधिक बालों का उगना, बाल झड़ना या वजन बढ़ना। अन्य लक्षणों में बिना स्तनपान के निप्पल से दूध जैसा सफेद डिस्चार्ज आना या सेक्स के दौरान दर्द महसूस होना शामिल हो सकता है। ध्यान रखें कि महिलाओं में इनफर्टिलिटी के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं और इसके कई कारण हो सकते हैं।

महिलाओं में बांझपन के क्या कारण हैं?

महिलाओं में बांझपन (Infertility) के कुछ आम कारण नीचे दिए गए हैं:

ओव्यूलेशन (अंडा बनने की प्रक्रिया) से जुड़ी समस्याएं

मासिक धर्म चक्र और ओव्यूलेशन की प्रक्रिया कई हार्मोन के संतुलन पर निर्भर करती है। मस्तिष्क का हाइपोथैलेमस और पिट्यूटरी ग्रंथि ऐसे हार्मोन जारी करते हैं, जो अंडाशय (ओवरी) को अंडे विकसित करने और रिलीज करने में मदद करते हैं। यदि यह प्रक्रिया प्रभावित होती है, तो ओव्यूलेशन अनियमित हो सकता है या रुक सकता है। अनियमित पीरियड्स या पीरियड्स का न आना ओव्यूलेशन से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है।

उम्र से जुड़ी समस्याएं

महिला की उम्र प्रजनन क्षमता को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक है। उम्र बढ़ने के साथ अंडों (Eggs) की संख्या और गुणवत्ता में धीरे-धीरे कमी आ सकती है, जिससे गर्भधारण में परेशानी हो सकती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि महिलाओं के अंडे जन्म से ही मौजूद होते हैं और समय के साथ उनकी गुणवत्ता में बदलाव आ सकता है। 35 साल के बाद कुछ महिलाओं में भ्रूण से जुड़ी आनुवंशिक समस्याओं और गर्भपात का जोखिम बढ़ सकता है।

फैलोपियन ट्यूब को नुकसान

फैलोपियन ट्यूब में रुकावट या नुकसान कई कारणों से हो सकता है, जैसे साल्पिंगाइटिस (फैलोपियन ट्यूब की सूजन) और पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (महिला प्रजनन अंगों का संक्रमण)। इन समस्याओं के कारण अंडे और शुक्राणु के मिलने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिससे गर्भधारण में परेशानी हो सकती है।

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS)

पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (PCOS) प्रजनन उम्र की महिलाओं में पाया जाने वाला एक आम हार्मोनल विकार है। इसमें हार्मोनल असंतुलन के कारण अनियमित पीरियड्स, ओव्यूलेशन में समस्या और गर्भधारण में कठिनाई हो सकती है। PCOS एक ऐसी स्थिति है जो शरीर के हार्मोनल संतुलन और अंडाशय के कामकाज को प्रभावित कर सकती है।

गर्भाशय से जुड़ी समस्याएं

इनमें गर्भाशय के पॉलीप्स, गर्भाशय के आकार से जुड़ी समस्याएं, गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स - गर्भाशय का निचला हिस्सा) में असामान्यताएं और गर्भाशय फाइब्रॉएड (गर्भाशय की दीवार में बनने वाली गैर-कैंसरयुक्त गांठ) शामिल हैं। ये समस्याएं कभी-कभी गर्भधारण में परेशानी का कारण बन सकती हैं। कुछ फाइब्रॉएड फैलोपियन ट्यूब में रुकावट पैदा कर सकते हैं या निषेचित अंडे के गर्भाशय में जुड़ने (इम्प्लांटेशन) की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।

गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) से जुड़ी समस्याएं

गर्भाशय का प्रवेश द्वार, सर्विक्स, योनि के ऊपरी हिस्से में स्थित होता है। शुक्राणु को गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब तक पहुंचने के लिए सर्विक्स से होकर गुजरना पड़ता है। ओव्यूलेशन के समय सर्विक्स का म्यूकस (तरल पदार्थ) आमतौर पर पतला और लचीला हो जाता है, जिससे शुक्राणुओं को आगे बढ़ने में मदद मिलती है। लेकिन कुछ महिलाओं में सर्विक्स का म्यूकस अधिक गाढ़ा हो सकता है, जिससे शुक्राणुओं की गति प्रभावित हो सकती है और गर्भधारण में परेशानी हो सकती है।

एंडोमेट्रियोसिस

एंडोमेट्रियोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें गर्भाशय की अंदरूनी परत जैसी ऊतक (Tissue) गर्भाशय के बाहर, पेल्विक एरिया के अन्य हिस्सों में विकसित होने लगते हैं। इससे ओवरी, फैलोपियन ट्यूब और आसपास के अंग प्रभावित हो सकते हैं। एंडोमेट्रियोसिस अंडे और शुक्राणु के मिलने, भ्रूण के विकास और गर्भाशय में भ्रूण के इम्प्लांटेशन की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।

प्राइमरी ओवेरियन इनसफिशिएंसी

यह स्थिति तब होती है जब 40 साल की उम्र से पहले ही ओवरी सामान्य रूप से काम करना कम कर देती हैं, जिससे पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं या बंद हो सकते हैं। कई मामलों में इसका स्पष्ट कारण पता नहीं चल पाता, लेकिन इम्यून सिस्टम से जुड़ी समस्याएं, टर्नर सिंड्रोम जैसी जेनेटिक स्थितियां और रेडिएशन या कीमोथेरेपी जैसे इलाज इसके कुछ कारण हो सकते हैं।

महिलाओं में बांझपन (Infertility)

महिलाओं में बांझपन का पता लगाने के लिए टेस्ट

महिलाओं में बांझपन (Infertility) का पता लगाने के लिए डॉक्टर आपकी मेडिकल हिस्ट्री, लक्षणों और जरूरत के अनुसार अलग-अलग जांच की सलाह दे सकते हैं। महिलाओं में बांझपन की जांच के लिए कुछ आम टेस्ट इस प्रकार हैं:

ब्लड टेस्ट - आपकी मेडिकल हिस्ट्री और डॉक्टर को किस समस्या की जांच करनी है, इसके आधार पर ब्लड टेस्ट तय किए जाते हैं। आमतौर पर थायरॉयड फंक्शन, पीरियड्स और ओव्यूलेशन से जुड़े हार्मोन लेवल और ओवेरियन रिजर्व (अंडों की संख्या और गुणवत्ता का अनुमान) की जांच की जा सकती है। जब उम्र के अनुसार ओवरी में अंडों की संख्या कम हो जाती है, तो इसे डिमिनिश्ड ओवेरियन रिजर्व (Diminished Ovarian Reserve) कहा जाता है।

ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड - इस जांच में हेल्थकेयर प्रोफेशनल योनि (Vagina) के माध्यम से एक प्रोब का इस्तेमाल करके गर्भाशय और ओवरी की जांच करते हैं। एब्डोमिनल अल्ट्रासाउंड में प्रोब को पेट के ऊपर रखकर जांच की जाती है।

एक्स-रे हिस्टेरोसाल्पिंगोग्राम (HSG) - इस जांच में एक्स-रे और कंट्रास्ट डाई की मदद से यह देखा जाता है कि फैलोपियन ट्यूब खुली हैं या उनमें किसी तरह की रुकावट है। इसके लिए डाई को सर्विक्स के माध्यम से गर्भाशय में डाला जाता है।

सलाइन इन्फ्यूजन सोनोग्राम (SIS) - SIS में गर्भाशय की अंदरूनी परत और कैविटी की जांच की जाती है, ताकि फाइब्रॉएड, पॉलीप्स या अन्य संरचनात्मक समस्याओं का पता लगाया जा सके। इस प्रक्रिया में ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड के दौरान गर्भाशय में सलाइन (खारा पानी) डाला जाता है, जिससे अंदर की संरचना को बेहतर तरीके से देखा जा सके।

हिस्टेरोस्कोपी - इस जांच में डॉक्टर सर्विक्स के माध्यम से हिस्टेरोस्कोप (कैमरा लगा एक पतला उपकरण) डालकर गर्भाशय के अंदर की जांच करते हैं। इससे गर्भाशय की अंदरूनी समस्याओं का पता लगाने में मदद मिलती है।

लैप्रोस्कोपी - यह एक सर्जिकल प्रक्रिया है जिसमें डॉक्टर पेट में छोटे चीरे के माध्यम से लैप्रोस्कोप (कैमरा लगा उपकरण) डालकर प्रजनन अंगों की जांच करते हैं। इसका इस्तेमाल आमतौर पर तब किया जाता है जब एंडोमेट्रियोसिस या अन्य समस्याओं का संदेह हो।

महिलाओं में बांझपन के इलाज के तरीके

सर्जरी

महिलाओं में बांझपन (Infertility) का इलाज इसके कारण पर निर्भर करता है। अगर समस्या प्रजनन अंगों से जुड़ी किसी स्थिति के कारण है, तो कुछ मामलों में सर्जरी की मदद ली जा सकती है। सर्जरी से फाइब्रॉएड, पॉलीप्स, एंडोमेट्रियोसिस और कुछ ओवेरियन सिस्ट जैसी समस्याओं का इलाज किया जा सकता है।

फाइब्रॉएड

गर्भाशय में बनने वाली गैर-कैंसरयुक्त गांठ, जो कभी-कभी गर्भधारण में परेशानी का कारण बन सकती है।

पॉलीप्स

गर्भाशय की अंदरूनी परत से निकलने वाले छोटे उभार, जो कुछ मामलों में गर्भधारण को प्रभावित कर सकते हैं।

एंडोमेट्रियोसिस

यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें गर्भाशय की अंदरूनी परत जैसी ऊतक गर्भाशय के बाहर बढ़ने लगती है। इससे कभी-कभी फैलोपियन ट्यूब या आसपास के अंग प्रभावित हो सकते हैं।

ओवेरियन सिस्ट

कुछ प्रकार के ओवेरियन सिस्ट को डॉक्टर की सलाह के अनुसार हटाया या उपचार किया जा सकता है।

अधिकतर मामलों में इन समस्याओं के इलाज के लिए लैप्रोस्कोप (पेट के माध्यम से) या हिस्टेरोस्कोप (सर्विक्स के माध्यम से गर्भाशय के अंदर) की मदद से की-होल सर्जरी की जाती है। हालांकि, कुछ स्थितियों में ओपन सर्जरी (पेट में चीरा लगाकर की जाने वाली सर्जरी) की आवश्यकता हो सकती है।

ओव्यूलेशन इंडक्शन (Ovulation Induction)

पीरियड्स का अनियमित होना या न आना कई बार ओव्यूलेशन (अंडा बनने और रिलीज होने की प्रक्रिया) में समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर कुछ दवाओं (गोलियों या इंजेक्शन के रूप में) की मदद से ओव्यूलेशन को शुरू करने या बेहतर करने में मदद कर सकते हैं। क्लोमीफीन साइट्रेट जैसी दवाएं शरीर में ओव्यूलेशन से जुड़े हार्मोन के स्तर को बढ़ाने में मदद कर सकती हैं। कुछ मामलों में इंजेक्शन के माध्यम से दिए जाने वाले हार्मोन भी ओवरी को अंडा विकसित करने और रिलीज करने में मदद करते हैं।

Book an online appointment with Dr. Divya Sardana for Fertility related issues.

असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजीज़ (ART)

असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजीज़ (ART) में ऐसी तकनीकें शामिल होती हैं जिनमें अंडे और शुक्राणु को शरीर के बाहर लैब में मिलाकर गर्भधारण में मदद की जाती है। इन-विट्रो फर्टिलाइज़ेशन (IVF) ART की एक प्रमुख तकनीक है। ART में हार्मोन स्टिमुलेशन के माध्यम से ओवरी को एक से ज्यादा अंडे विकसित करने के लिए प्रेरित किया जाता है। इसके बाद अल्ट्रासाउंड की मदद से एक प्रक्रिया द्वारा अंडे निकाले जाते हैं और लैब में फर्टिलाइजेशन की प्रक्रिया की जाती है।

book a fertility consultation

निष्कर्ष

बच्चे की योजना बना रहे जोड़ों के लिए बांझपन (Infertility) का सामना करना भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हालांकि, आज के समय में आधुनिक मेडिकल तकनीकों और बेहतर इलाज के विकल्पों की मदद से कई जोड़ों के लिए गर्भधारण की संभावना बढ़ाई जा सकती है। महिलाओं में बांझपन के मैनेजमेंट के दौरान, क्लाउडनाइन के डॉक्टर समस्या के कारण का पता लगाकर उचित इलाज और मार्गदर्शन प्रदान कर सकते हैं। सही समय पर जांच और उपचार से कई महिलाओं को गर्भधारण करने में मदद मिल सकती है। अगर आप इनफर्टिलिटी से जुड़ी किसी समस्या का सामना कर रहे हैं, तो क्लाउडनाइन के अनुभवी गायनेकोलॉजिस्ट से सलाह लेना माता-पिता बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

Want to consult the best fertility in india? Please find the links below.
  1. Best Fertility in Hyderabad
  2. Top Fertility in Chennai
  3. Best Fertility in Bangalore
  4. Best Fertility in Chandigarh
  5. Top Fertility in Faridabad
  6. Top Fertility in Ghaziabad
  7. Best Fertility in Gurugram
  8. Best Fertility in Lucknow
  9. Top Fertility in Ludhiana
  10. Top Fertility in Mumbai
  11. Best Fertility in New delhi
  12. Top Fertility in Noida
  13. Top Fertility in Panchukula
  14. Best Fertility in Pune
  15. Best Fertility in Jalandhar

Get the right solution today

Thank you! Your submission has been received!
Oops! Something went wrong while submitting the form.
Maternity
Gynaecology
Fertility
Neonatal Care
Paediatric Care
NICU
PICU
Radiology
Physiotherapy
Nutrition and Dietetics
Breastfeeding Support
Allied Services
Stem Cell Banking
Bengaluru
Chandigarh
Chennai
Faridabad
Ghaziabad
Gurugram
Hyderabad
Jalandhar
Lucknow
Ludhiana
Mumbai
New Delhi
Noida
Panchkula
Pune

Frequently Asked Questions

महिला में बांझपन का निदान कैसे करें?

डॉक्टर मेडिकल हिस्ट्री, शारीरिक जांच, हार्मोन टेस्ट, अल्ट्रासाउंड, ओव्यूलेशन टेस्ट और फैलोपियन ट्यूब की जांच (HSG) जैसी जांचों की मदद से बांझपन के कारण का पता लगा सकते हैं।

कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?

यदि आपकी उम्र 35 वर्ष से कम है और 1 साल तक नियमित रूप से प्रयास करने के बाद भी गर्भधारण नहीं हो रहा है, या आपकी उम्र 35 वर्ष से अधिक है और 6 महीने प्रयास के बाद भी गर्भधारण नहीं हो रहा है, तो क्लाउडनाइन के डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है।

क्या खराब लाइफस्टाइल के कारण बांझपन हो सकता है?

हाँ, जीवनशैली से जुड़े कुछ कारक प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। बहुत ज्यादा या बहुत कम वजन, अत्यधिक तनाव, नींद की कमी, असंतुलित आहार और स्मोकिंग या शराब जैसी आदतें हार्मोनल संतुलन और गर्भधारण की संभावना को प्रभावित कर सकती हैं।

क्या बांझपन का इलाज हमेशा सफल होता है?

बांझपन के इलाज की सफलता महिला की उम्र, बांझपन के कारण और चुने गए इलाज के तरीके जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है। कम उम्र में जांच और इलाज शुरू करने से कई मामलों में बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। आधुनिक तकनीकों जैसे IVF की मदद से कई कपल्स को गर्भधारण में सहायता मिल रही है।

//form validation// //form validation 2//