डेंगू बुखार एक बीमारी है जो चार डेंगू वायरस में से किसी एक से संक्रमित मच्छर के काटने से फैलती है। इसके लक्षण आमतौर पर फ्लू जैसे होते हैं, जिनमें बुखार, रैश और मांसपेशियों में दर्द शामिल हैं। लेकिन यह गंभीर डेंगू (डेंगू हेमरेजिक फीवर) में बदल सकता है, जो जानलेवा हो सकता है। गंभीर डेंगू के लक्षणों में पेट दर्द, बहुत ज़्यादा उल्टी और खून बहना शामिल हैं।

डेंगू बुखार एक वायरल संक्रमण है जो फ्लेविवायरस फैमिली के डेंगू वायरस से होता है। यह मच्छरों, खासकर एडीज एजिप्टी और एडीज एल्बोपिक्टस के काटने से फैलता है।
यह वायरस चार अलग-अलग सीरोटाइप में पाया जाता है: DENV-1, DENV-2, DENV-3 और DENV-4। हर संक्रमण से उस खास सीरोटाइप के खिलाफ जीवनभर के लिए इम्यूनिटी मिलती है, लेकिन बाकी सीरोटाइप्स के खिलाफ केवल आंशिक और अस्थायी सुरक्षा मिलती है।
डेंगू बुखार के लक्षण आमतौर पर छोटे बच्चों और पहली बार संक्रमण होने वालों में हल्के होते हैं। बड़े बच्चों, वयस्कों और पहले संक्रमण हो चुके लोगों में हल्के से लेकर गंभीर लक्षण तक हो सकते हैं।
बुखार डेंगू का सबसे आम लक्षण है। संक्रमित मच्छर के काटने के 3 से 14 दिनों के भीतर बुखार आ सकता है।
तेज़ बुखार आमतौर पर 2 से 7 दिनों तक रहता है।
6 साल से कम उम्र के बच्चों में तेज़ बुखार के कारण ऐंठन हो सकती है।
तेज़ सिरदर्द
आँखों के पीछे दर्द
हड्डियों, मांसपेशियों और जोड़ों में तेज़ दर्द
शरीर पर रैश
डेंगू का एक प्रमुख संकेत रैश होता है, जो अक्सर शरीर के बड़े हिस्से को ढक लेता है।
यह आमतौर पर बुखार शुरू होने के 3–4 दिन बाद दिखाई देता है।

अगर आपको शक है कि आपके बच्चे को डेंगू बुखार है, तो पास के क्लाउडनाइन के अनुभवी डॉक्टर से परामर्श लें।
अगर बच्चे में लक्षण दिखें और डेंगू का संदेह हो, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है। डॉक्टर मेडिकल हिस्ट्री और हाल की यात्रा के बारे में पूछ सकते हैं, खासकर अगर बच्चा किसी ऐसे क्षेत्र में गया हो जहाँ डेंगू आम है।
डायग्नोसिस के लिए डॉक्टर शारीरिक जांच करेंगे और ब्लड टेस्ट करवाया जाएगा। डेंगू का निदान लक्षणों, शारीरिक जांच और लैब टेस्ट के आधार पर किया जाता है।
ब्लड टेस्ट: खून में एंटीबॉडी (डेंगू IgM) का पता लगाया जाता है।
PCR टेस्ट: यह वायरस के जेनेटिक मटेरियल का पता लगाने की तकनीक है, जिससे खून में डेंगू वायरस की पुष्टि की जाती है।
NS1 एंटीजन टेस्ट: यह टेस्ट शुरुआती चरण (बुखार के शुरुआती दिनों) में डेंगू वायरस का पता लगाने में मदद करता है।
डेंगू बुखार का कोई विशेष इलाज नहीं होता, लेकिन लक्षणों को नियंत्रित करके बच्चे की देखभाल की जाती है। ऐसे मामलों में आप क्लाउडनाइन के अनुभवी डॉक्टर से परामर्श ले सकते हैं।
बच्चे को पर्याप्त बेड रेस्ट दें।
डॉक्टर बुखार और दर्द से राहत के लिए पैरासिटामोल दे सकते हैं।
डिहाइड्रेशन से बचाव के लिए पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ दें।
डिहाइड्रेशन के लक्षणों पर ध्यान दें।
सावधानी: बच्चे को एस्पिरिन, आइबुप्रोफेन और एंटीबायोटिक्स न दें।
बुखार कम होने के दौरान, खासकर लक्षण शुरू होने के 3–7 दिनों के बीच, चेतावनी वाले संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है।
कुछ मामलों में डेंगू गंभीर रूप ले सकता है, जिसे गंभीर डेंगू या डेंगू हेमरेजिक फीवर कहा जाता है। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है और समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा हो सकता है।
डेंगू बुखार से बचने का सबसे असरदार तरीका है मच्छरों के काटने से बचाव और सावधानी रखना। इसके लिए कुछ उपाय अपनाए जा सकते हैं:
खिड़कियों और दरवाजों पर जाली लगाएँ और टूटी जालियों की मरम्मत करें।
बिना जाली वाले दरवाजे और खिड़कियाँ बंद रखें।
बच्चों को बाहर जाते समय लंबी पैंट, पूरी आस्तीन की शर्ट, जूते और मोज़े पहनाएँ।
बच्चों को सुबह और शाम के समय, जब मच्छर अधिक सक्रिय होते हैं, कम बाहर रखें।
बाहर जाते समय मच्छर भगाने वाली क्रीम का उपयोग करें।
याद रखें कि अगर आपको शक हो कि आपके बच्चे को डेंगू बुखार हो सकता है, तो क्लाउडनाइन के अनुभवी डॉक्टर्स से परामर्श लें |

बच्चों में डेंगू बुखार का जल्दी पता लगने से इसका प्रभावी और सही इलाज करना आसान हो जाता है।
क्लाउडनाइन हॉस्पिटल में बच्चों के विशेषज्ञों की एक समर्पित और अनुभवी टीम उपलब्ध है, जो कंसल्टेशन, स्क्रीनिंग, डायग्नोसिस और इलाज के माध्यम से मरीजों को सर्वोत्तम देखभाल प्रदान करती है।
अगर आपको डेंगू संक्रमण को लेकर कोई चिंता या सवाल है, तो आज ही अपॉइंटमेंट बुक करने के लिए हमसे संपर्क करें।
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डेंगू में बच्चों को हल्का, पौष्टिक और आसानी से पचने वाला भोजन देना चाहिए। विटामिन C से भरपूर फल, हरी सब्जियाँ, साबुत अनाज और प्रोटीन युक्त आहार शरीर को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। पपीता, कीवी, नारियल पानी, सूप और पर्याप्त तरल पदार्थ शरीर को हाइड्रेट रखने में सहायक होते हैं।
डेंगू में तला-भुना, ज्यादा मसालेदार और भारी भोजन नहीं देना चाहिए। कैफीन, कोल्ड ड्रिंक्स, अत्यधिक मीठे पेय और जंक फूड से भी बचना बेहतर होता है, क्योंकि ये शरीर में डिहाइड्रेशन बढ़ा सकते हैं।
आमतौर पर डेंगू के चौथे दिन से प्लेटलेट्स कम होने शुरू हो सकते हैं। यह सातवें दिन तक सबसे कम स्तर पर पहुँच सकते हैं, जिसके बाद धीरे-धीरे सुधार शुरू होता है। अधिकांश बच्चों में लगभग दसवें दिन तक प्लेटलेट्स सामान्य होने लगते हैं।
डेंगू का कोई विशेष इलाज नहीं है, लेकिन सही देखभाल और समय पर उपचार से इसे प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है। पर्याप्त आराम, तरल पदार्थ और बुखार के लिए डॉक्टर द्वारा सुझाई गई दवाएँ मदद करती हैं। गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्ती और निगरानी की आवश्यकता हो सकती है।