प्रेगनेंसी का सफर एक महिला के लिए बेहद खूबसूरत और खास होता है, लेकिन इस दौरान शरीर में कई शारीरिक बदलाव भी होते हैं। वजन बढ़ने और हार्मोनल बदलावों के कारण शरीर के अलग-अलग हिस्सों में दर्द होना आम बात है। इन्हीं समस्याओं में से एक है गर्भावस्था के दौरान पैरों में दर्द होना।
कई महिलाएं शिकायत करती हैं कि रात को सोते समय उनके पैरों में तेज दर्द या ऐंठन (Leg Cramps) होती है। आइए इस आर्टिकल में विस्तार से जानते हैं कि प्रेगनेंसी में पैरों में दर्द कब होता है, इसके मुख्य कारण क्या हैं और इससे राहत पाने के घरेलू उपाय क्या हो सकते हैं।
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आमतौर पर पैरों में दर्द और ऐंठन की समस्या दूसरी (2nd Trimester) और तीसरी तिमाही (3rd Trimester) में ज्यादा देखने को मिलती है। इसके पीछे कुछ मुख्य कारण हो सकते हैं:
प्रेगनेंसी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, शिशु और मां दोनों का वजन बढ़ता है। इस बढ़े हुए वजन का दबाव पैरों की मांसपेशियों और नसों पर पड़ सकता है, जिससे दर्द और भारीपन महसूस हो सकता है।
शरीर में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर बढ़ने से मांसपेशियां रिलैक्स हो जाती हैं, जिससे पैरों में भारीपन और दर्द महसूस हो सकता है।
गर्भाशय का आकार बढ़ने से पीठ और पैरों की ओर जाने वाली रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) पर दबाव पड़ सकता है, जिससे पैरों में रक्त का प्रवाह प्रभावित हो सकता है।
शरीर में कैल्शियम, मैग्नीशियम या पानी की कमी (Dehydration) होने से भी पैरों में ऐंठन की समस्या हो सकती है।
प्रेगनेंसी का 8वां महीना आते-आते बच्चा लगभग पूरी तरह विकसित हो चुका होता है। इस चरण में पैरों में दर्द की समस्या बढ़ सकती है, क्योंकि:
पेल्विक एरिया पर दबाव: बच्चे का आकार बढ़ने और नीचे की ओर आने से पेल्विक हिस्से की नसों और आसपास के हिस्सों पर दबाव पड़ सकता है। इससे दर्द कूल्हों से होते हुए पैरों तक महसूस हो सकता है।
पैरों में सूजन (Edema): 8वें महीने में शरीर में तरल पदार्थ की मात्रा बढ़ने और रक्त संचार में बदलाव के कारण पैरों और टखनों में सूजन आ सकती है। इस वजह से पैरों में भारीपन और असहजता महसूस हो सकती है।
प्रेगनेंसी में सिर्फ एक पैर में दर्द क्यों होता है? (Pregnancy me ek pair me dard kyu hota hai)
कई बार महिलाओं को दोनों पैरों के बजाय केवल दाहिने या बाएं (किसी एक) पैर में ही दर्द महसूस होता है। इसके पीछे कुछ कारण हो सकते हैं:
साइटिका (Sciatica): बढ़ते हुए गर्भाशय और शरीर में होने वाले बदलावों के कारण साइटिक नर्व (पीठ के निचले हिस्से से पैर तक जाने वाली नस) पर दबाव पड़ सकता है। इससे कमर के निचले हिस्से से लेकर किसी एक पैर तक तेज दर्द, झनझनाहट या सुन्नपन महसूस हो सकता है।
सोने की पोजीशन: लंबे समय तक एक ही करवट में सोने या एक ही स्थिति में रहने से कुछ महिलाओं को एक पैर में दबाव या असहजता महसूस हो सकती है।
चेतावनी: यदि सिर्फ एक ही पैर में ज्यादा सूजन है, वह हिस्सा लाल हो गया है या छूने पर गर्म महसूस होता है, तो यह DVT (Deep Vein Thrombosis - नस में खून का थक्का जमना) का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

गर्भावस्था में बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी पेनकिलर (दर्द निवारक दवा) नहीं लेनी चाहिए। इसलिए पैरों के दर्द और ऐंठन से राहत के लिए आप ये उपाय अपना सकती हैं:
टब में गुनगुना पानी लें और उसमें कुछ देर के लिए अपने पैर डुबोकर बैठें। इससे मांसपेशियों को आराम मिल सकता है और दर्द या थकान में राहत महसूस हो सकती है।
जब भी आप बैठें या आराम करें, अपने पैरों के नीचे तकिए रखकर उन्हें थोड़ा ऊंचा रखें। इससे पैरों में जमा अतिरिक्त तरल पदार्थ के कारण होने वाली सूजन को कम करने में मदद मिल सकती है।
रात को सोने से पहले पैरों और पिंडलियों की हल्के हाथों से मालिश करें। इससे मांसपेशियों को आराम मिल सकता है और भारीपन कम महसूस हो सकता है।
दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे। अपनी डाइट में कैल्शियम और मैग्नीशियम से भरपूर चीजें जैसे दूध, दही, पनीर, केला और हरी पत्तेदार सब्जियां शामिल करें।
रोजाना हल्की वॉक करें। सोने से पहले पैरों की उंगलियों को आगे-पीछे घुमाकर हल्की स्ट्रेचिंग करें। इससे रात में होने वाली ऐंठन को कम करने में मदद मिल सकती है।

वैसे तो प्रेगनेंसी में पैरों में दर्द और ऐंठन आम हो सकती है, लेकिन यदि आपको निम्नलिखित लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत क्लाउडनाइन के डॉक्टर से संपर्क करें:
पैर में अचानक बहुत ज्यादा या असहनीय दर्द होना।
एक पैर दूसरे पैर की तुलना में ज्यादा सूज जाना, लाल होना या गर्म महसूस होना।
पैरों में लगातार सुन्नपन (Numbness) या कमजोरी महसूस होना।
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बिल्कुल नहीं। यह एक अंधविश्वास है। गर्भावस्था में पैरों में दर्द होना आमतौर पर वजन बढ़ने, हार्मोनल बदलावों, मांसपेशियों पर बढ़ते दबाव और शरीर में होने वाले बदलावों के कारण होता है। इसका शिशु के लिंग (Boy or Girl) से कोई संबंध नहीं है।
अगर रात को अचानक पिंडली में ऐंठन (Leg Cramp) हो जाए, तो घबराएं नहीं। अपने पैर को सीधा करें और पैर के पंजे को अपनी ओर ऊपर की तरफ खींचकर हल्का स्ट्रेच करें। इससे मांसपेशियों में खिंचाव कम हो सकता है। इसके अलावा, प्रभावित हिस्से पर हल्की मालिश या गुनगुनी सिकाई से भी राहत मिल सकती है।
आमतौर पर पैरों में दर्द और ऐंठन की समस्या दूसरी तिमाही (चौथे या पांचवें महीने के आसपास) से शुरू हो सकती है। जैसे-जैसे प्रेगनेंसी आगे बढ़ती है और बच्चे का वजन बढ़ता है, तीसरी तिमाही (7वें, 8वें और 9वें महीने) में पैरों में दर्द और सूजन ज्यादा महसूस हो सकती है।
बिल्कुल नहीं। गर्भावस्था के दौरान बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी पेनकिलर नहीं लेनी चाहिए। कुछ दवाएं गर्भावस्था में सुरक्षित नहीं मानी जाती हैं। दर्द होने पर पहले डॉक्टर से सलाह लें और उनकी बताई हुई दवाओं या उपायों का ही पालन करें।