पीरियड्स की तारीख निकल गई है, लेकिन पीरियड्स नहीं आए हैं, तो मन में पहला सवाल यही आता है कि क्या मैं गर्भवती हूँ? लेकिन पीरियड्स का लेट होना हमेशा गर्भावस्था का कारण नहीं होता। तनाव, वज़न में बदलाव, पीसीओएस और थायराइड जैसी कई वजहें मासिक चक्र में देरी का कारण बन सकती हैं।
इस लेख में आप जानेंगे कि पीरियड्स लेट क्यों होते हैं, कितनी देरी सामान्य मानी जाती है, कौन-से उपाय मासिक चक्र को नियमित करने में मदद कर सकते हैं और किन हालात में डॉक्टर के पास जाना ज़रूरी है।

सामान्य चक्र लगभग 21 से 35 दिन का होता है।
एक-दो दिन आगे-पीछे होना आम बात है।
यौन रूप से सक्रिय महिला में देरी हो तो सबसे पहले गर्भावस्था की जाँच करें।
35 दिन से ज़्यादा देरी, लगातार तीन बार देरी, या तीन महीने तक पीरियड्स न आना डॉक्टर को दिखाने का संकेत है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य मासिक चक्र लगभग 28 दिन का होता है, हालाँकि इसकी अवधि में कुछ अंतर हो सकता है। यदि दो पीरियड्स के बीच 35 दिनों से अधिक का अंतर हो, तो इसे लंबा मासिक चक्र माना जाता है। चक्र की गिनती एक पीरियड के पहले दिन से अगले पीरियड के पहले दिन तक होती है।
एक और बात ध्यान रखें। यदि आपके पीरियड्स नियमित रहते हैं, लेकिन इस बार तीन दिन से अधिक की देरी हो, लगातार तीन चक्रों में देरी हो या 16 वर्ष की उम्र तक पीरियड्स शुरू न हुए हों, तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित है।
यौन रूप से सक्रिय महिलाओं में पीरियड्स रुकने का एक आम कारण गर्भावस्था है। पीरियड्स की संभावित तारीख निकल जाने के बाद सुबह के पहले मूत्र से गर्भावस्था की जाँच करना बेहतर रहता है। नतीजा नकारात्मक हो और पीरियड्स में देरी जारी रहे, तो कुछ दिन बाद दोबारा जाँच करें।
लगातार चिंता, भावनात्मक झटका, परीक्षा या नौकरी का दबाव हार्मोन के संतुलन को प्रभावित कर सकता है। तनाव पीरियड्स में देरी का एक आम कारण है। इससे अंडोत्सर्ग की प्रक्रिया में देरी हो सकती है और पीरियड्स देर से आ सकते हैं।
बहुत ज़्यादा वज़न घटने या बहुत कम वज़न होने पर अंडोत्सर्ग की प्रक्रिया अस्थायी रूप से रुक सकती है, जिससे पीरियड्स देर से आते हैं या बंद हो सकते हैं। मोटापा भी हार्मोन के संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
अत्यधिक कसरत से शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर घट सकता है, जिससे पीरियड्स छूट सकते हैं। खिलाड़ियों और कठोर आहार नियमों का पालन करने वाली महिलाओं में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है। खान-पान से जुड़ी गंभीर समस्याएँ भी हार्मोन के संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं।
पीसीओएस से पीड़ित कई महिलाओं के पीरियड्स अनियमित होते हैं या कम आते हैं, क्योंकि इस स्थिति में अंडोत्सर्ग प्रभावित हो सकता है। इसके साथ ये लक्षण भी हो सकते हैं:
चेहरे और शरीर पर अनचाहे बाल
मुँहासे
वज़न बढ़ना
बालों का पतला होना
थायराइड ग्रंथि के अधिक या कम सक्रिय होने, दोनों ही स्थितियों में पीरियड्स देर से आ सकते हैं या अनियमित हो सकते हैं। थकान, वज़न में बदलाव, ठंड या गर्मी अधिक लगना और बालों का झड़ना इसके संकेत हो सकते हैं।
यह हार्मोन स्तन में दूध बनने की प्रक्रिया से जुड़ा है। इसका स्तर बढ़ने पर अंडोत्सर्ग रुक सकता है और पीरियड्स देर से आ सकते हैं।
टाइप 1 मधुमेह से पीड़ित महिलाओं में पीरियड्स अनियमित होने की संभावना अधिक हो सकती है। रक्त शर्करा के स्तर में उतार-चढ़ाव मासिक चक्र को प्रभावित कर सकता है।
गर्भनिरोधक गोलियाँ बार-बार शुरू और बंद करने से भी पीरियड्स में देरी हो सकती है। इन्हें बंद करने के बाद मासिक चक्र को सामान्य होने में कुछ महीने लग सकते हैं। आपातकालीन गर्भनिरोधक गोली लेने के बाद अगला पीरियड्स आगे या पीछे हो सकता है।
प्रसव के बाद पीरियड्स दोबारा शुरू होने में समय लग सकता है। स्तनपान कराने वाली माताओं में पीरियड्स लौटने में अधिक समय लग सकता है।
इस दौर में पीरियड्स का देर से आना आम है, लेकिन यदि वे बहुत अधिक मात्रा में आएँ या कम अंतराल पर बार-बार आएँ, तो डॉक्टर को बताना चाहिए। यह दौर आमतौर पर 40 वर्ष की उम्र के बाद शुरू होता है।
यदि 40 वर्ष की उम्र से पहले ही पीरियड्स बंद हो जाएँ या लंबे समय तक न आएँ, तो यह अंडाशय की कार्यक्षमता में समय से पहले कमी (Premature Ovarian Insufficiency) का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में जाँच और डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज ज़रूरी है।
ध्यान दें: किशोरियों में पीरियड्स शुरू होने के शुरुआती वर्षों में मासिक चक्र का अनियमित रहना आम बात है। हालाँकि, यदि पीरियड्स में बहुत अधिक देरी हो या कोई अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
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ये सुझाव जीवनशैली में सुधार करने के लिए हैं। हर कारण का समाधान केवल इन उपायों से नहीं हो सकता।
पहले गर्भावस्था की जाँच करें।
तनाव कम करें। गहरी साँसें लें, ध्यान करें, हल्की सैर करें और अपनी पसंद के कामों के लिए समय निकालें।
संतुलित भोजन करें। दाल, हरी सब्ज़ियाँ, फल, अनाज, दूध-दही और मेवे अपने आहार में शामिल करें। बहुत कम खाने से बचें।
स्वस्थ वज़न बनाए रखें। वज़न में बदलाव धीरे-धीरे करें और ज़रूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लें।
संतुलित व्यायाम करें। रोज़ 30 मिनट सैर करें या योग अपनाएँ। अत्यधिक कसरत से बचें।
पूरी नींद लें। रोज़ 7 से 8 घंटे सोएँ और सोने-जागने का समय तय रखें।
पीरियड्स का रिकॉर्ड रखें। मोबाइल ऐप की मदद से पीरियड्स पर नज़र रखना आसान है। पीरियड्स शुरू और खत्म होने की तारीख, रक्तस्राव की मात्रा और दर्द के बारे में जानकारी लिखें।
ज़रूरत के अनुसार जाँच कराएँ। अगर पीरियड्स बार-बार अनियमित होते हैं, तो डॉक्टर की सलाह से थायराइड, प्रोलैक्टिन या अल्ट्रासाउंड की जाँच कराएँ।
पीरियड्स “लाने” के लिए बिना डॉक्टर की सलाह के हार्मोन की गोलियाँ न लें।
कच्चे पपीते या किसी भी काढ़े का अधिक मात्रा में सेवन बिना डॉक्टर की सलाह के न करें। इनके प्रभाव के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। गर्भावस्था की संभावना होने पर इनका सेवन जोखिम पैदा कर सकता है।
गर्भावस्था की आशंका हो, तो कोई भी दवा लेने से पहले गर्भावस्था की जाँच कराएँ।
पीरियड्स आने में 35 दिनों से ज़्यादा की देरी हो और गर्भावस्था की जाँच का परिणाम नकारात्मक हो।
तीन महीने या उससे अधिक समय तक पीरियड्स न आना।
लगातार तीन बार पीरियड्स देर से आएँ।
16 वर्ष की उम्र तक पहला पीरियड न आया हो।
पेट में तेज़ दर्द हो, बहुत ज़्यादा रक्तस्राव हो या चक्कर आ रहे हों।
चेहरे पर अनचाहे बाल हों, वज़न तेज़ी से बढ़ रहा हो या स्तनों से दूध जैसा स्राव हो।
गर्भावस्था की जाँच का परिणाम सकारात्मक हो और साथ में तेज़ दर्द या रक्तस्राव हो। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से मिलें।
पीरियड्स बार-बार देर से आएँ, तो सही कारण जानने के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श करना सबसे अच्छा तरीका है। क्लाउडनाइन की शुरुआत 2007 में हुई थी। आज यह भारत में 20 से अधिक केंद्रों के माध्यम से महिलाओं और बच्चों के लिए स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करता है। दिल्ली-एनसीआर में भी आप पटपड़गंज और गुरुग्राम जैसे केंद्रों पर परामर्श ले सकती हैं।

स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श: पीरियड्स में देरी, अनियमित चक्र और कम या ज़्यादा रक्तस्राव जैसी समस्याओं के बारे में अनुभवी डॉक्टर से परामर्श।
कारण की जाँच: लक्षणों के आधार पर डॉक्टर गर्भावस्था की जाँच, रक्त जाँच और अल्ट्रासाउंड जैसी ज़रूरी जाँचें सुझा सकते हैं।
पीसीओएस और थायरॉइड संबंधी समस्याओं का प्रबंधन: सही निदान के बाद आहार, जीवनशैली में बदलाव और ज़रूरत पड़ने पर दवाओं की सलाह।
प्रजनन संबंधी मार्गदर्शन: गर्भधारण में कठिनाई होने पर अस्पताल में उपलब्ध प्रजनन संबंधी सेवाओं के बारे में जानकारी और मार्गदर्शन।
मरीज़ों का अनुभव: मरीज़ों की समीक्षाओं में डॉक्टरों के सहयोगी व्यवहार और नर्सिंग स्टाफ की देखभाल की सराहना की गई है। मरीज़ों की समीक्षाएँ पढ़ें।
अपने नज़दीकी क्लाउडनाइन अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ से समय लेकर परामर्श करें। समय पर जाँच कराने से समस्या के कारण का पता लगाने और उचित उपचार शुरू करने में मदद मिल सकती है।
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अगर दो पीरियड्स के बीच का अंतर 35 दिनों से ज़्यादा हो, तो डॉक्टर से सलाह लें, खासकर अगर ऐसा बार-बार हो। गर्भावस्था की संभावना हो, तो जाँच करें। लगातार तीन बार पीरियड्स देर से आने पर भी डॉक्टर से परामर्श लें।
हाँ, तनाव शरीर के हार्मोनल संतुलन को प्रभावित कर सकता है, जिससे अंडोत्सर्ग में देरी हो सकती है और पीरियड्स देर से आ सकते हैं।
हाँ, पीसीओएस अनियमित या देर से आने वाले पीरियड्स का एक आम कारण है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार से पीरियड्स के चक्र को नियमित करने में मदद मिल सकती है।
जिन महिलाओं का वज़न अधिक है, उनमें धीरे-धीरे वज़न घटाने से पीरियड्स नियमित करने में मदद मिल सकती है। हालाँकि, बहुत तेज़ी से वज़न घटाने या बहुत कम खाने से पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं।