गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में जी मिचलाना और उल्टी होना बहुत आम बात है। ज़्यादातर महिलाओं को पहली तिमाही (1st Trimester) में ये दिक्कत होती है। यह आमतौर पर 6वें हफ्ते से शुरू होकर 12–14वें हफ्ते तक चल सकती है। भले ही यह परेशानी देती हो, लेकिन यह सामान्य शारीरिक बदलावों की वजह से होती है और ज़्यादातर हानिकारक नहीं होती। अगर आप समझ लें कि ऐसा क्यों होता है और उल्टी कम करने वाले आसान व सुरक्षित घरेलू उपाय अपनाएँ, तो आपकी गर्भावस्था की रोज़मर्रा की दिनचर्या काफी आरामदायक हो सकती है।

गर्भावस्था की शुरुआत में हॉर्मोन जैसे hCG (human chorionic gonadotropin) और प्रोजेस्टेरोन तेज़ी से बढ़ते हैं, जिनकी वजह से पाचन धीमा हो जाता है और मतली (nausea) बढ़ सकती है। कई महिलाओं में गंध के प्रति संवेदनशीलता भी बढ़ जाती है, जिससे कुछ खाने की खुशबू या महक अचानक बर्दाश्त नहीं होती। सुबह खाली पेट होना, तनाव, थकान और पानी की कमी भी उल्टी की समस्या बढ़ा सकते हैं। अच्छी बात यह है कि ये लक्षण कुछ समय के लिए होते हैं और ज़्यादातर महिलाओं को दूसरे ट्राइमेस्टर में पहुँचते-पहुँचते काफी राहत मिलने लगती है।
हालांकि हर महिला में लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं, गर्भावस्था के दौरान उल्टी होने के सामान्य कारणों में निम्न शामिल हो सकते हैं।
अगर आप सोच रही हैं कि प्रेग्नेंसी में उल्टी रोकने के घरेलू उपाय क्या हैं, तो ये उपाय अक्सर आसान, प्राकृतिक (नेचुरल) और सुरक्षित होते हैं। ये घरेलू उपाय बिना दवा के अच्छी राहत दे सकते हैं।
अदरक मतली के लिए सबसे असरदार प्राकृतिक नुस्खों में से एक है।
अदरक की एक गर्म कप चाय पेट को आराम दे सकती है और उल्टी को कम कर सकती है।
जब आप बाहर हों या यात्रा कर रहे हों, तो चीनी में लिपटी अदरक या अदरक की टॉफ़ी तुरंत आराम देती है।
ताज़े अदरक के कुछ स्लाइस पानी में उबालें और मतली को कंट्रोल करने के लिए दिन भर धीरे-धीरे पिएं।

नींबू की खुशबू और स्वाद उल्टी की बेचैनी को तुरंत कम कर सकते हैं।
पानी में नींबू निचोड़कर पीने से पेट शांत होता है और उल्टी जैसी बेचैनी कम हो जाती है।
उल्टी अचानक आए तो नींबू साथ रखना मदद करता है। नींबू को सूँघें या थोड़ा चूसें, इससे उल्टी जैसा लगने और उल्टी में आराम मिलता है।
हल्का नींबू और शहद वाला पानी पीने से पेट हल्का महसूस होता है और डिहाइड्रेशन से बचने में मदद मिलती है।
डिहाइड्रेशन से मतली और बढ़ जाती है, इसलिए नियमित रूप से पानी पीना ज़रूरी है।
ये उपाय आपके शरीर को राहत देते हैं और गर्भावस्था में उल्टी कम करने के लिए अपनाए गए अन्य नुस्खों के साथ अच्छी तरह काम करते हैं।
पेट खाली होने पर मतली ज़्यादा महसूस होती है। थोड़ी-थोड़ी देर में हल्का भोजन करने से राहत मिलती है। ड्राई फ्रूट्स, नट्स, क्रैकर्स और फल अच्छे स्नैक्स विकल्प हैं।
प्रेग्नेंसी में उल्टी के बाद ये हल्के खाद्य पदार्थ पेट को राहत देते हैं:
इन्हें तब तक खाती रहें, जब तक आपकी भूख पहले जैसी न हो जाए।|
गर्भावस्था के दौरान सभी हर्ब्स (herbs) सुरक्षित नहीं होतीं, लेकिन ये चाय हल्की और असरदार हो सकती हैं:
पुदीने की चाय (Mint Tea): पेट की मांसपेशियों को आराम देने में मदद करती है।
अदरक की चाय (Ginger Tea): उल्टी और जी मिचलाना कम करती है।
डॉक्टर की इजाज़त के बिना तेज़ या अनजान हर्बल चाय से बचें।
जिन चीज़ों से उल्टी होती है, उनसे बचें—इससे आपको काफी राहत मिल सकती है।

पेट नाज़ुक हो तो हल्का और बिना तेल वाला खाना खाएँ। जैसे:
ये चीज़ें उल्टी के बाद एनर्जी वापस लाती हैं और प्रेग्नेंसी में सुरक्षित रूप से खाई जा सकती हैं।
हालांकि घरेलू नुस्खे ज़्यादातर मामलों में असरदार होते हैं, लेकिन कुछ स्थितियों में मेडिकल सलाह बहुत ज़रूरी हो जाती है। अगर आपको ये लक्षण महसूस हों, तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें:

कभी-कभी उल्टी बहुत ज़्यादा होने पर एक्सपर्ट केयर लेना ज़रूरी हो जाता है। Cloudnine Hospital में अनुभवी डॉक्टर प्रेग्नेंसी के लिए विशेष कंसल्टेशन देते हैं। वे आपके लक्षण, डाइट और मेडिकल हिस्ट्री देखकर आपके लिए एक पर्सनल केयर प्लान तैयार करते हैं। उनकी टीम प्रेग्नेंट महिलाओं को सुरक्षित इलाज, सही मार्गदर्शन और 24×7 सपोर्ट प्रदान करती है। न्यूट्रिशन सलाह से लेकर एडवांस्ड टेस्ट तक—Cloudnine Hospital का केयर मॉडल लगातार मतली या अन्य प्रेग्नेंसी संबंधी दिक्कतों में आराम और भरोसा देता है। यहाँ का सुरक्षित माहौल और एक्सपर्ट सुपरविज़न पूरे सफ़र में महिलाओं को सपोर्ट महसूस कराता है।
गर्भावस्था के दौरान उल्टी होना आम बात है, और ज़्यादातर समय इसे घरेलू नुस्खों, हल्के खाने और सही हाइड्रेशन से मैनेज किया जा सकता है। उल्टी कम करने के तरीके जानना और सही खाना चुनना लक्षणों में राहत देता है। लेकिन अगर मतली बहुत ज़्यादा हो या रुक न रही हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी है। सही देखभाल से ज्यादातर महिलाओं को प्रेग्नेंसी बढ़ने के साथ आराम मिलने लगता है।
हार्मोनल उतार-चढ़ाव, गंधों के प्रति बढ़ी हुई संवेदनशीलता और लो ब्लड शुगर के कारण अक्सर जी मिचलाना और उल्टी होती है।
केले, सादे चावल, क्रैकर्स, सूप और सेब की चटनी पेट के लिए हल्के होते हैं और जी मिचलाने में राहत देते हैं।
लगातार उल्टी होना, जिससे खाना या तरल पदार्थ नहीं ले पाना, हाइपरमेसिस ग्रेविडेरम का संकेत हो सकता है और इसके लिए मेडिकल देखभाल की ज़रूरत होती है।
हल्की से मध्यम उल्टी से मिसकैरेज नहीं होता है। बहुत ज़्यादा डिहाइड्रेशन होने पर मेडिकल मदद की ज़रूरत होती है, लेकिन आमतौर पर इलाज से इसे मैनेज किया जा सकता है।