प्रेग्नेंसी एक महिला की ज़िंदगी का एक खूबसूरत लेकिन नाज़ुक दौर होता है। इस दौरान, पोषण बहुत ज़रूरी भूमिका निभाता है - न सिर्फ़ बच्चे की वृद्धि और विकास के लिए, बल्कि माँ की सेहत और भलाई के लिए भी। प्रेग्नेंसी के दौरान क्या खाना चाहिए और क्या नहीं, यह जानना सुरक्षा और सही पोषण, दोनों के लिए ज़रूरी है। एक संतुलित आहार एनीमिया, जेस्टेशनल डायबिटीज या समय से पहले डिलीवरी जैसी दिक्कतों को कम कर सकती है, और बच्चे की भविष्य की सेहत के लिए एक मज़बूत नींव रखने में मदद कर सकती है।

प्रेग्नेंसी के दौरान, शरीर में कुछ पोषक तत्वों की ज़रूरत काफी बढ़ जाती है। मुख्य पोषक तत्व हैं:
सही पोषण से बच्चा स्वस्थ तरीके से बढ़ता है और माँ को ऊर्जा, मजबूत इम्यूनिटी और अच्छी सेहत बनाए रखने में मदद मिलती है।
आइए जानते हैं प्रेगनेंसी के दौरान कौन-कौन सी चीज़ें खाना फायदेमंद होता है।

प्रोटीन आपके होने वाले बच्चे के शरीर को बनाने में मदद करता है। इससे बच्चे के अंग, मांसपेशियाँ और टिश्यू सही तरह से विकसित होते हैं।
कहाँ से मिलेगा?
चिकन या टर्की जैसे कम चर्बी वाले मांस, अंडे, दालें-फलियाँ, पनीर और टोफू।
क्या फायदा होता है?
बच्चे की वृद्धि अच्छी होती है, शरीर में ज़रूरी हार्मोन बनते हैं और एंजाइम सही से काम करते हैं।
आसान खाने के सुझाव:
रोटी के साथ मूंग दाल, पालक डालकर बनाए अंडा भुर्जी, या हल्की मसालेदार पनीर की सब्ज़ी।
कैल्शियम बच्चे की हड्डियों और दाँतों को मज़बूत बनाता है और माँ की मांसपेशियों को सही तरह से काम करने में मदद करता है।
कहाँ से मिलेगा?
दूध, दही और पाश्चराइज्ड पनीर।
क्या फायदा होता है?
बच्चे की हड्डियाँ मज़बूत बनती हैं और माँ को आगे चलकर हड्डियों की कमज़ोरी (ऑस्टियोपोरोसिस) से बचाव मिलता है।
आसान खाने के सुझाव:
सुबह नाश्ते में एक गिलास दूध, खाने के साथ दही, या घर का बना पनीर पराठा।
आयरन एनीमिया से बचाता है और यह पक्का करता है कि माँ और बच्चे दोनों को ऑक्सीजन ठीक से मिले।
कहाँ से मिलेगा?
पत्तेदार सब्जियां (पालक, मेथी), बीन्स, दालें, साबुत अनाज, किशमिश और खुबानी जैसे सूखे मेवे।
क्या फायदा होता है?:
आयरन वाले खाने को विटामिन C से भरपूर खाने (जैसे संतरे या टमाटर) के साथ खाएं ताकि आयरन शरीर में अच्छी तरह से एब्जॉर्ब हो सके।
आसान खाने के सुझाव:
ब्राउन राइस के साथ पालक दाल और छोले का सलाद।

दिमाग और आंखों के विकास के लिए फैट्स बहुत ज़रूरी हैं।
कहाँ से मिलेगा?
कम मरकरी वाली मछली (सैल्मन, सार्डिन), मेवे (बादाम, अखरोट), बीज (अलसी, चिया)।
क्या फायदा होता है?
सोचने-समझने की क्षमता को बेहतर बनाता है और सूजन कम करता है।
आसान खाने के सुझा
अखरोट की स्मूदी, चिया सीड पुडिंग, सब्जियों के साथ ग्रिल्ड सैल्मन।
रंग-बिरंगी फल और सब्जियाँ खाने से शरीर को ज़रूरी विटामिन, मिनरल्स और फाइबर मिलते हैं, जो प्रेगनेंसी में बहुत फायदेमंद होते हैं।
कौन-कौन सी खाएँ?
गाजर, शिमला मिर्च, टमाटर, बेरी, पपीता, अमरूद आदि।
क्या फायदा होता है?
पाचन सही रहता है, इम्यूनिटी मज़बूत होती है और शरीर को एंटीऑक्सीडेंट मिलते हैं।
आसान खाने के सुझाव:
सुबह नाश्ते में फ्रूट बाउल, और खाने में रोटी के साथ मिली-जुली सब्ज़ी।

साबुत अनाज से मिलने वाले कार्बोहाइड्रेट शरीर को रोज़मर्रा की गतिविधियों और बच्चे के सही विकास के लिए ज़रूरी ऊर्जा देते हैं।
कहाँ से मिलेगा?
ब्राउन राइस, ओट्स, बाजरा, साबुत गेहूं और क्विनोआ।
क्या फायदा होता है?
ब्लड शुगर लेवल संतुलित रहता है और फाइबर मिलने से पाचन भी अच्छा रहता है।
आसान खाने के सुझाव:
सुबह ओटमील दलिया, या दोपहर या रात के खाने में बाजरे की खिचड़ी।
प्रेग्नेंसी में शरीर को सही तरह से काम करने, पाचन ठीक रखने और बच्चे के चारों ओर मौजूद एमनियोटिक द्रव को संतुलित रखने के लिए पर्याप्त तरल पदार्थ लेना बहुत ज़रूरी होता है।
क्या पिएँ?
पानी, नारियल पानी, घर का बना सूप और प्रेग्नेंसी के लिए सुरक्षित हर्बल चाय।
हेल्दी स्नैक्स क्या लें?
ताज़े फल, भुने हुए मेवे, दही और साबुत अनाज से बने क्रैकर्स।
फायदा क्या होता है?
डिहाइड्रेशन से बचाव होता है, एनर्जी बनी रहती है और बार-बार भूख लगने पर स्वास्थ्यकर ऑप्शन मिलते हैं।

प्रेग्नेंसी के दौरान क्या खाना चाहिए, यह जानना जितना ज़रूरी है, उतना ही यह जानना भी ज़रूरी है कि किन चीज़ों से बचना चाहिए। कुछ खाने की चीज़ें बच्चे के विकास या माँ की सेहत के लिए खतरा बन सकती हैं।
कच्चा या अधपका मांस, मछली और अंडे में हानिकारक बैक्टीरिया हो सकते हैं।
स्वोर्डफ़िश, शार्क, किंग मैकरेल और टाइलफ़िश बच्चे के दिमाग़ के विकास को नुकसान पहुँचा सकती हैं।
कच्चे दूध और बिना ठीक से धुले फल-सब्ज़ियों में इंफेक्शन का खतरा रहता है।
बिना पाश्चराइज्ड दूध से बनी सॉफ्ट चीज़ (जैसे ब्री, फेटा) में लिस्टेरिया हो सकता है।

प्रेग्नेंसी में शराब पूरी तरह असुरक्षित है।
ज़्यादा चीनी, ट्रांस फैट और तला-भुना खाना वज़न बढ़ाता है और जेस्टेशनल डायबिटीज का खतरा बढ़ाता है।
कच्चे स्प्राउट्स, कुछ हर्बल प्रोडक्ट और बिना डॉक्टर की सलाह के सप्लीमेंट से बचें, क्योंकि ये गर्भाशय को उत्तेजित कर सकते हैं।
थोड़ा-थोड़ा करके बार-बार खाएं। अदरक की चाय या सादा बिस्किट (क्रैकर्स) लें। बहुत ज़्यादा मसालेदार और तैलीय खाना खाने से बचें।

स्रोत: दूध, दही, फोर्टिफाइड जूस। विटामिन D के लिए रोज़ थोड़ी देर धूप लें।
स्रोत: कम मरकरी वाली मछली, चिया सीड्स, अलसी के बीज और अखरोट।
क्लाउडनाइन एक्सपर्ट मेडिकल केयर और पर्सनलाइज़्ड न्यूट्रिशन गाइडेंस को एक साथ जोड़ता है। यहाँ अनुभवी ऑब्स्टेट्रिशियन, डाइटिशियन और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स की टीम होती है, जो हर तिमाही के अनुसार सही डाइट सलाह देती है।
क्लाउडनाइन प्रेग्नेंसी के लिए आसान मील प्लान और रोज़मर्रा में काम आने वाले प्रैक्टिकल टिप्स भी प्रदान करता है। उनका समग्र (होलिस्टिक) तरीका यह सुनिश्चित करता है कि माँ और बच्चे — दोनों को पूरी और सही देखभाल मिले, जिससे बच्चे का स्वस्थ विकास हो सके और प्रेग्नेंसी के दौरान आने वाली आम समस्याओं को बेहतर तरीके से संभाला जा सके।
प्रेग्नेंसी के दौरान सही खाना खाने का मतलब है यह जानना कि क्या खाना फायदेमंद है और किस चीज़ से बचना चाहिए। प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, हेल्दी फैट्स, फल, सब्ज़ियाँ और कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट वाला संतुलित आहार माँ की सेहत और बच्चे के सही विकास के लिए बहुत ज़रूरी होता है। सुरक्षित खाने की आदतें अपनाकर और सोच-समझकर भोजन करने से प्रेग्नेंसी का सफ़र स्वस्थ और खुशहाल बन सकता है।

कच्चा/अधपका मांस और अंडे, ज़्यादा मरकरी वाली मछली, बिना पाश्चराइज्ड डेयरी उत्पाद, शराब, ज़्यादा कैफीन, और प्रोसेस्ड जंक फूड से बचें।
दिन भर एनर्जी के लिए दूध और मेवे के साथ ओटमील, स्मूदी, या अंडे के साथ साबुत अनाज का टोस्ट जैसा पोषक तत्वों से भरपूर नाश्ता करें।
हाँ, ब्राउन या हल्के उबले चावल कॉम्प्लेक्स कार्ब्स और एनर्जी का एक बेहतरीन सोर्स हैं। संतुलित भोजन के लिए इसे दाल या सब्जियों के साथ खाएं।
हल्दी, जीरा, धनिया और अदरक जैसे हल्के से मध्यम मसाले सुरक्षित हैं। अगर बहुत ज़्यादा मसालेदार खाना खाने से सीने में जलन या मतली होती है, तो ऐसे खाने से बचें।