महिलाओं को कई कारणों से हल्के पीरियड, पीरियड्स के दौरान कम ब्लीडिंग या मेंस्ट्रुअल फ्लो में काफ़ी कमी महसूस हो सकती है — जैसे कि तनाव, वज़न में बदलाव, दवाइयों का इस्तेमाल, या हार्मोनल बदलाव, खान-पान में पोषक तत्वों की कमी, अनुचित जीवनशैली । हालांकि ज़्यादातर मामलों में यह चिंता की बात नहीं होती, लेकिन हल्के पीरियड प्रेग्नेंसी या किसी अंदरूनी मेडिकल समस्या का संकेत हो सकते हैं, जिन पर ध्यान देना ज़रूरी है। पूरी मेडिकल जांच से कारण का पता लगाने और सही इलाज करने में मदद मिलती है।
यह लेख हल्के पीरियड्स के संभावित कारणों, लक्षणों और इलाज के विकल्पों के बारे में बताता है, जिससे महिलाओं को पीरियड में कम ब्लीडिंग होने के कारणों को बेहतर ढंग से समझने और मैनेज करने में मदद मिलेगी।

पीरियड्स का फ्लो हर महीने स्वाभाविक रूप से अलग-अलग हो सकता है, और कभी-कभी यह सामान्य से हल्का भी हो सकता है। हल्के पीरियड में आमतौर पर 5 mL से कम खून निकलता है, जो एक साइकिल में औसतन होने वाले लगभग 80 mL फ्लो से काफी कम होता है। यह बदलाव शरीर में होने वाले शारीरिक और हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण हो सकता है, जिसमें तनाव, जीवनशैली में बदलाव या अन्य कारण शामिल हैं।हालांकि यह अक्सर सामान्य होता है, लेकिन अगर पीरियड्स के दौरान खून का फ्लो लगातार कम होता रहे, तो किसी अंदरूनी समस्या का पता लगाने के लिए मेडिकल जांच की ज़रूरत पड़ सकती है।
महिलाओं में पीरियड्स का फ्लो काफ़ी अलग-अलग हो सकता है। कुछ महिलाओं को हर महीने इसमें बदलाव महसूस होता है, जबकि कुछ का पीरियड पैटर्न लगभग एक-सा रहता है। कम उम्र में ज़्यादा फ्लो होना उम्र बढ़ने के साथ-साथ अपने आप कम हो सकता है। हालांकि, पीरियड्स का फ्लो कम होने के पीछे हार्मोनल असंतुलन, तनाव, वज़न में उतार-चढ़ाव, कुछ दवाओं का इस्तेमाल या कोई अंदरूनी स्वास्थ्य समस्या भी कारण हो सकती है। हल्के पीरियड्स के कारणों को समझने से यह पहचानने में मदद मिलती है कि पीरियड फ्लो कम होने की स्थिति में डॉक्टर की सलाह कब लेना ज़रूरी हो सकता है।
आपकी पूरी ज़िंदगी में पीरियड का फ्लो एक-सा नहीं रहता। प्यूबर्टी (puberty) के समय पीरियड फ्लो हल्का या भारी हो सकता है। उम्र बढ़ने के साथ पीरियड्स अक्सर रेगुलर हो जाते हैं। वहीं, पेरिमेनोपॉज़ (perimenopause) के दौरान पीरियड्स हल्के या अनियमित हो सकते हैं। इसलिए उम्र आपके मेंस्ट्रुअल फ्लो को प्रभावित करती है।
वज़न बढ़ने या घटने से पीरियड साइकिल और फ्लो में बदलाव हो सकता है। बहुत तेज़ी से वज़न घटने पर फैट लेवल कम हो जाता है, जिससे ओव्यूलेशन प्रभावित हो सकता है और पीरियड फ्लो कम हो सकता है।
हल्के पीरियड्स और प्रेग्नेंसी का संबंध हो सकता है, लेकिन प्रेग्नेंसी में ब्लीडिंग सामान्य नहीं मानी जाती जब तक कि डॉक्टर इसे कन्फर्म न कर दें। कभी-कभी प्रेग्नेंसी के शुरुआती दिनों में इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग होती है, जब फर्टिलाइज्ड एग यूट्रस की लाइनिंग से जुड़ता है। कई लोग इसे हल्के पीरियड्स समझ लेते हैं।

हार्मोनल असंतुलन के कारण पीरियड साइकिल और फ्लो में बदलाव हो सकता है। PCOD/PCOS, थायरॉइड समस्याएँ और अन्य हार्मोनल बदलाव हल्के पीरियड्स का कारण बन सकते हैं।
ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पीरियड्स मिस हो सकते हैं या बहुत हल्के हो सकते हैं। डिलीवरी के बाद मेंस्ट्रुअल साइकिल को रेगुलर होने में कुछ महीने लगना सामान्य है।
हार्मोनल बर्थ कंट्रोल पिल्स ओव्यूलेशन को दबा देती हैं, जिससे पीरियड्स हल्के और रेगुलर हो सकते हैं।
लंबे समय तक तनाव रहने से हार्मोनल संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे पीरियड फ्लो सामान्य से कम हो सकता है।
बहुत ज़्यादा या स्ट्रेन वाली एक्सरसाइज़ करने से पीरियड्स के समय, अवधि और फ्लो में बदलाव हो सकता है। संतुलित और रेगुलर एक्सरसाइज़ आमतौर पर फायदेमंद रहती है।
थायरॉइड समस्याएँ, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) जैसी स्थितियाँ हार्मोनल संतुलन को प्रभावित करती हैं, जिससे ओव्यूलेशन और गर्भाशय की परत पर असर पड़ता है और पीरियड फ्लो कम हो सकता है।
बहुत कम खाना, लगातार भूखे रहना या खाने के बाद उल्टी करना (जैसे एनोरेक्सिया या बुलिमिया में) शरीर को ज़रूरी पोषण नहीं मिलने देता। इससे हार्मोनल असंतुलन होता है, जिसके कारण पीरियड्स हल्के या अनियमित हो सकते हैं।

कई बार यह समझ पाना मुश्किल हो सकता है कि पीरियड्स का फ्लो सामान्य से कम है या नहीं, क्योंकि इसके लिए समय-समय पर ब्लड लॉस को ट्रैक करना ज़रूरी होता है। इसे इस्तेमाल किए गए पैड की संख्या नोट करके समझा जा सकता है। इसके अलावा, मेंस्ट्रुअल कप का इस्तेमाल भी ब्लड फ्लो का अनुमान लगाने का एक असरदार तरीका हो सकता है।
अगर मेंस्ट्रुअल ब्लड फ्लो सामान्य से कम है, तो आपको ये कुछ आम बदलाव महसूस हो सकते हैं:
आम तौर पर पीरियड में कम ब्लीडिंग होने पर राहत पाने के लिए आप कुछ घरेलू नुस्खों का उपयोग कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि कौन-से घरेलू उपाय आपको पीरियड में कम ब्लीडिंग को मैनेज करने में सहायता प्रदान कर सकते हैं —

पीरियड्स के फ्लो में मामूली उतार-चढ़ाव सामान्य हैं और आमतौर पर चिंता की बात नहीं होती। हालांकि, अपने साइकिल में यदि कोई बड़ा या लगातार बदलाव दिखे, तो उस पर ध्यान देना ज़रूरी है और सही डायग्नोसिस के लिए डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
अगर आपको नियमित रूप से सामान्य से हल्का मेंस्ट्रुअल फ्लो होता है — खासकर अगर ऐसा कई महीनों तक लगातार हो — तो अपने डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी है।
पीरियड्स मिस होना या देरी से आना, और इसके साथ हल्का ब्लड फ्लो होना, हार्मोनल असंतुलन या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है।
अगर हल्के पीरियड्स के साथ पेल्विक दर्द भी हो रहा है, तो डॉक्टर को ज़रूर दिखाएं, क्योंकि यह कभी-कभी पेल्विक इन्फेक्शन जैसी गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है।
यदि हल्के पीरियड्स के साथ भारी ब्लीडिंग, तेज़ ऐंठन, या असामान्य स्पॉटिंग भी हो रही है, तो प्रोफेशनल मेडिकल सलाह लेना बहुत ज़रूरी है।
अगर आपको दो–तीन महीने तक पीरियड्स नहीं आए हैं, तो सही जांच और डायग्नोसिस के लिए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
पीरियड में कम ब्लीडिंग होना हमेशा किसी समस्या का संकेत नहीं होता। लेकिन अगर आप नैचुरल तरीके से ब्लड फ्लो बेहतर करना चाहती हैं, तो हाइड्रेशन बनाए रखें, गर्म और हल्का खाना खाएं, हल्की एक्सरसाइज़ करें और स्ट्रेस मैनेजमेंट पर ध्यान दें। अगर पीरियड्स लगातार अनियमित रहें, तो पर्सनल सलाह के लिए किसी गायनेकोलॉजिस्ट से ज़रूर मिलें। पीरियड हेल्थ से जुड़ी सही गाइडेंस के लिए आप क्लाउडनाइन पर किसी एक्सपर्ट गायनेकोलॉजिस्ट के साथ कंसल्टेशन ले सकती हैं।

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हां, बर्थ कंट्रोल लेने पर हल्के पीरियड्स होने की संभावना होती है। हार्मोनल बर्थ कंट्रोल के इस्तेमाल से आपके पीरियड्स का फ्लो बदल सकता है।
हां, हल्के पीरियड्स किसी हेल्थ कंडीशन का संकेत हो सकते हैं, जिसमें थायराइड डिस्फंक्शन, PCOS और स्ट्रेस शामिल हैं।
कभी-कभी पीरियड कम आने से हार्मोनल असंतुलन, गर्भधारण में दिक्कत, ओवरी और गर्भाशय की परत कमजोर, शरीर में पोषण की कमी, मानसिक तनाव, जल्दी मेनोपॉज का खतरा और हड्डियां कमजोरी जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।