शिशुओं में कैल्शियम की कमी हाइपोकैल्सीमिया के लक्षण

"ह्य्पोकाल्सेमिअ एक नूबोर्न बेबी के ब्लड में कैल्शियम की कमी होने को बोलते हैं | ये जादातर तब होता है जब खून में कैल्शियम ८ मिलीग्राम पैर डेसीलिटर से काम होता है | इसके कारण दो तरीके से हो सकते हैं | एक अगर पहले ७२ घंटे में सिम्प्टम आ रहा है ह्य्पोकाल्सेमिअ के तो उसमे माँ के कारण या पैदा होने के वक़्त की दिक्कत आने के कारण हो सकता है | इसमें गेस्टेशनल डायबिटीज एक कारण हो सकता है | प्रीमेच्योर की वजह से हो सकता है | या बच्चे के न रोने की वजह से हो सकता है | जो लेट ह्य्पोकाल्सेमिअ होता है वो ७२ घंटे के बाद देखने को मिलता है | इसमें जादातर प्रीमेच्योर, कोई ब्लड ट्रांसफ्यूज़न कोई बच्चे की दवाई की वजह से कैल्शियम की कमी होना | बच्चे को गायें या भैंस का दूध देने की वजह से कैल्शियम की कमी होना | या कोई हार्मोनल इम्बैलेंस या विटामिन डी डेफिशियेंसी की वजह से भी हो सकता है | ह्य्पोकाल्सेमिअ के सिम्पटम्स में दौरे आने हाथ पैर के झटके लगने, अच्छे से फीड न लेना एब्नार्मल तरीके से रोना बच्चे का ज़ादा सुस्त होना या ज़ादा टेम्परेचर काम हो जाना एक सिम्पटम्स हो सकते हैं | ह्य्पोकाल्सेमिअ का ट्रीटमेंट एक अच्छे नूबोर्न केयर सेटिंग में हो सकता है | इसके लिए कुछ ब्लड टेस्ट करने पड़ते हैं जो ह्य्पोकाल्सेमिअ के लिए कारण ढूंढ़ने के लिए ज़रूरी है | एक प्रॉपर मॉनिटरिंग करनी पड़ती है और ह्य्पोकाल्सेमिअ की सेवरिटी के हिसाब से हमें या तो ड्रिप में कैल्शियम करेक्शन देना पड़ता है | या हम मुँह की दवाई से कैल्शियम करेक्शन कर सकते हैं"